चुनाव 2019: सोशल मीडिया का आक्रामक तरीके से इस्तेमाल कैसे करेंगे राजनीतिक दल ? 232

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में इस साल होने वाले आम चुनाव में सोशल मीडिया रणनीति बन गयी है राजनीतिक पार्टियों की सबसे बड़ी कूटनीति
— रज़ा हसनैन नक़वी

युद्धकौशल, युद्ध चालन विद्या, कुटिल नीति, कूटनीति या छलविद्या — आप जो चाहे नाम दे दें आज की राजनीति को। लेकिन एक बात सोलह आने सच है कि आज के तकनीकी मोबाइल इनटरनेट दौर में सोशल मीडिया नाम की चिड़िया पूरे भारत की राजनीति में पर फैलाये बैठी है। 
भारत में चुनाव 2019 सर पर है और इस साल देश की सत्रहवीं लोक सभा का गठन होगा। अप्रैल-मई में ही देश के 90 करोड़ मतदाता अपना कीमती वोट किसी न किसी पार्टी उम्मीदवार, स्वतंत्र उम्मीदवार या नोटा को दे ही देंगे। अब पार्टियों के लिए सबसे बड़ा सरदर्द ये है कि किस तरह के चुनावी पासे फेंके जाए की गोट आगे बढ़े तो सारे वोट उसके ईवीएम – नुमा झोली में गिरते जाए। 
इन सब राजनीतिक पार्टियों के विश्लेषकों एवं हाई कमान में वैसे एक बात पर सर्व सहमति है। यदि आज मोबाइल से लैस वोटरों को अपनी तरफ़ खींचना है तो सोशल मीडिया नाम की चिड़िया को दाना डालना होगा, क्योंकि ये चिड़िया सब वोटरों को बहुत पसंद है। ऐसा न किया तो चिड़िया फुर्र से उड़ जाएगी और उनकी राजनीतिक किस्मत भी हवा बन के रह जायेगी।

सोशल मीडिया रणनीति के तीन हथियार
आज के भारत की राजनीति में सोशल मीडिया के नाम पर तीन सोशल वेबसाइट या मंच सबसे ज़्यादा प्रचलित हैं — व्हाट्सएप, ट्विटर और फ़ेसबूक। सब राजनीतिक पार्टियाँ और चुनावी उम्मीदवार इन तीनों सोशल साइटों का सटीक इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि स्मार्टफ़ोन रखने वाले मतदाताओं को अपनी तरफ़ लुभा सकें।


#1. व्हाट्सएप का प्रहार
देश में आज यदि 90 करोड़ मतदाता हैं तो उनमें से 50 करोड़ इनटरनेट से जुड़े हुए हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि इनमें से करीब 45 करोड़ वोटर स्मार्टफ़ोन यूज़र हैं। स्मार्टफ़ोन यूज़र होने के साथ-साथ इनमें से करीब 20 करोड़ व्हाट्सएप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। 
राजनीतिक पार्टियों में होड़ मची हुई है कि कैसे ज़्यादा से ज़्यादा व्हाट्सएप यूज़र्स को अपने बनाये हुए व्हाट्सएप ग्रुप्स में जोड़ लें। इस तरह से उन मतदाताओं के दिमाग में अपनी पार्टी के काम, सिद्धांत और चुनावी उम्मीदवार को अंकित कर दें और उसे वोट देने के लिये प्रभावित कर दें। 
एक तरह से ये व्हाट्सएप मार्केटिंग का भी बड़ा हिस्सा होता है, जिसे यदि सही सोशल मीडिया विशेषज्ञों के द्वारा संचालित किया जाए तो राजनीतिक पार्टियों को बहुत लाभ मिल सकता है।

# 2. ट्विटर का निशाना
ट्विटर पर करोडों भारतीय वोटर रोज़ अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। न्यूज़ चैनल और अख़बार आये दिन कोई न कोई नई राजनीतिक मुहिम, कांड, घोटाले या महागठबंधन के बारे में बता रहे हैं। आज का मतदाता इन सब बातों पर कड़ी नज़र रखे हुए है और ट्विटर पर बेबाकी से इन बातों को शेयर, लाइक और कमेंट कर रहा है।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी ट्विटर पर आज बहुत हो रही है। न्यूज़ मीडिया भी ट्विटर के राजनीतिक ट्वीट्स को अच्छा कवरेज देती है। अब सभी पार्टियां और चुनाव 2019 के चुनाव उम्मीदवार अपने ट्विटर एकाउंट बना रहे हैं ताकि इस सोशल मीडिया के माध्यम से अपने वोटरों से जुड़े रहें। लेकिन व्यस्तता के कारण चाह कर भी उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। ऐसे में यदि पेशेवर सोशल मीडिया विशेषग्यों का सहारा लिया जाए तो बहुत अच्छे नतीजे मिल सकते हैं और कई अच्छे ट्विटर फ़ॉलोवर भी। 

# 3. फ़ेसबुक का झटका
भारत में आज 30 करोड़ फ़ेसबूक यूज़र हैं। राजनीतिक पार्टियाँ और राजनेता फ़ेसबूक की शक्ति से परिचित हैं। कोई न कोई फ़ेसबुक पोस्ट आजकल वायरल हो ही जाता है जिसकी वजह से भारतीय राजनीति में हड़कंप मच जाता है। फ़ेसबूक पर मिलने वाले वोटरों को अपनी सोच से जोड़ने के लिए भारतीय राजनीति के दिग्गज भी रोज़ फ़ेसबुक पर पोस्ट कर रहे हैं। इससे पार्टी का आम कार्यकर्ता भी प्रभावित हो रहा है और मतदाता भी।

#4. सोशल मीडिया विशेषज्ञ का सहारा
आज सोशल साइटों की बहुत धूम है। लेकिन ये भी सत्य है कि इन सोशल मीडिया मंचों को चलाने वाली कंपनियाँ आये दिन कुछ नया परिवर्तन लाती रहती हैं। इससे कई बार यूज़र्स के मन में उलझन और भ्रम पैदा हो जाता है। ऐसे में सोशल मीडिया विशेषज्ञों का यदि सहारा मिल जाता है तो इन सोशल साइटों की अहम भूमिका जो कि प्रचार-प्रसार है, उसमें तेज़ी आती है। 

#5. गूगल सर्च से मदद
अगर आप ये लेख पढ़ रहे हैं तो आप गूगल और गूगल सर्च के बारे में जानते हैं। आज 90% से ज़्यादा अगर इनटरनेट पर कोई जानकारी सर्च की जाती है तो उसमें गूगल सर्च इंजन का इस्तेमाल होता है। अब यदि सोशल मीडिया मार्केटिंग या डिजिटल मार्केटिंग किस तरह से किसी पार्टी या चुनाव उम्मीदवार के प्रचार-प्रसार में मदद कर सकती है ये अगर आपको जानना है तो गूगल की मदद लेनी होगी।

सही डिजिटल एजेंसी
ध्यान में रखने वाली बात ये है कि आज सभी बड़ी पार्टियाँ और राजनीति की दिग्गज हस्तियाँ अपने वोटरों को समेट कर रखने के लिए सही और अच्छी डिजिटल एजेंसी की मदद लेती हैं। अब कौन सी सही डिजिटल एजेंसी है जो सोशल मीडिया के इस खेल को अच्छी तरह से जानती है उसके लिए आप एक गूगल सर्च करिये। टाइप करिये “digital marketing agency” और अपने शहर का नाम। गूगल तुरंत आपको लिस्टिंग दिखायेगा। अब उन एजेंसियों के वेबसाइट पर जाइये, उनके पोर्टफ़ोलियो या काम को देखिए और संतुष्ट होने पर उस एजेंसी को कॉल लगाइये। 
इस तरह से बात आगे बढ़ेगी और आपके हाथ से सोशल मीडिया की चिड़िया दाना भी चुगना शुरू कर देगी।

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