चीन से जुड़े वो चार कारण जिससे मसूद अज़हर अब तक ग्लोबल टेररिस्ट नहीं घोषित किया जा सका 90

पुलवामा हमले को अंजाम देने वाला जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का लीडर मसूद अज़हर को चीन कई कारणों से समर्थन दे रहा है  

14 February को पुलवामा के अवंतीपोरा में CRPF के जवानों पर हुए फ़िदायीन हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान-समर्थित जैश -ए -मोहम्मद (जैश) आतंकी संगठन ने ली है।

पाकिस्तान का कहना है कि इसमें उसका हाथ नहीं है। उसने कहा है कि पुलवामा हमले के पीछे अगर पाकिस्तान की भागीदारी है तो इसका सबूत भारत दे तो हम सहयोग देंगे आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कोई भी कदम उठाने में।

चीन ने भी कहा है की वो हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है। लेकिन जब भी कोई प्रस्ताव जैश के सरगना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का आता है संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर में तो चीन उसे किसी न किसी बहाने ब्लॉक कर देता है। 

पढ़िए: आतंक की ज़हरीली साज़िश कब तक बर्दाश्त करेगा हिंदुस्तान

वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के प्रयास 

  • जैश के प्रमुख मसूद अज़हर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करवाने के लिए भारत ने पहला प्रयास किया था 2008 – 09 में जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ था।  चीन ने उस समय ‘टेक्निकल होल्ड ‘ कह कर ये प्रस्ताव पारित नहीं होने दिया था।
  • भारत ने मार्च 2016 में संयुक्त राष्ट्र में प्रयास किया तो चीन ने ब्लॉक कर दिया। 
  • भारत ने दिसंबर 2016 में फिर प्रयास किया तो चीन ने फिर ब्लॉक कर दिया। 
  • जनवरी 2017 में अमरीका, इंग्लैंड और फ्रांस मिलकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाये, लेकिन चीन ने फिर उसे ब्लॉक कर दिया।
  • 2018 मे अमरीका फिर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाया की मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगे, लेकिन चीन ने फिर ब्लॉक कर दिया। 

पाकिस्तान और मसूद अज़हर को चीन का समर्थन इन चार कारणों से मिलता है:


 1 . भारत को अपना प्रतिद्वंदी मानना

2 . पाकिस्तान के साथ अदला-बदली की दोस्ती

3 . चीन का 51 अरब डॉलर का निवेश

4 . भारत का दलाई लामा को शरण देना 

पढ़िए: मोस्ट फ़ेवर्ड नेशन का दर्जा छीनकर भारत ने पाकिस्तान को दिए ये तीन झटके


1 . भारत को अपना प्रतिद्वंदी मानना

चीन भारत को अपना प्रतिद्वंदी मानता है और साथ ही एक ख़तरा भी। वो इस तरह की कार्यवाई इसलिए करता है ताकि भारत को नुक्सान पहुंचे और पाकिस्तान को फायदा पहुंचे और वो संतुष्ट हो। 

2 . पाकिस्तान के साथ अदला-बदली की दोस्ती 

पाकिस्तान और चीन की पुरानी दोस्ती है। पाकिस्तान हर उस जगह चीन का समर्थन करता है जहाँ चीन का प्रतिधिनित्व नहीं है जैसे नॉन अलाइन्ड मूवमेंट (NAM) मंच में।  इसकी वजह से चीन पाकिस्तान को पूरा समर्थन देता है संयुक्त राष्ट्र में अपने वीटो पावर को अपना कर।

3 . चीन का 51 अरब डॉलर का निवेश 

चीन ने अपने वन रोड वन बेल्ट (OROB) प्लान में 51 अरब डॉलर निवेश किया है, जिसका एक अहम हिस्सा है- चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर।  इस निवेश से वो पाकिस्तान और बलोचिस्तान में भी बुनियादी सुविधाओं का विकास कर रहा है और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम कर रहा है। पाकिस्तान में कई चीनी नागरिक इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। ये एक व्यावसायिक फैसला है जिसको चीन किसी तरह से क्षति नहीं पहुँचाना चाहता है। 

4 . भारत का दलाई लामा को शरण देना 

भारत ने दलाई लामा को 1959 में अपने देश में शरण दी थी। चीन इस बात से भारत से नाराज़ रहता है क्योंकि वो दलाई लामा को एक आतंकी से कम नहीं समझता है। इस नाराज़गी की वजह से वो पाकिस्तान का समर्थन करता है ये जानते हुए कि भारत को बुरा लगेगा।

चीन ने मसूद अज़हर को अभी तक ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने में अपनी सहमति नहीं दी है। अमरीका, इंग्लैंड , फ्रांस सब इस बात से सहमत हैं कि जैश के प्रमुख को वैश्विक आतंकवादी घोषित करना चाहिए।  ऐसा होने से मसूद अज़हर पर ग्लोबल ट्रेवल बैन लग जायेगा और उसके बैंक खाते और प्रॉपर्टी को भी फ़्रीज़ किया जा सकेगा। 

आने वाले दिनों में देखना है कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते चीन अपने रवैये में कोई सुधार करता है कि नहीं।  


Previous ArticleNext Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *