आखिर खलनायक क्यों बन रहे है लोगों के रोल मॉडल 1074

शोले के गब्बर हो या मिस्टर इंडिया के मोगैम्बो हमेशा दर्शकों के दिलो पर राज़ खलनायकों ने ही किया है। बॉलीवुड में ये चलन 59 साल पुराना है। जब मुग़ल ए आज़म के अकबर (पृथ्वीराज कपूर) शहज़ादे सलीम (दिलीप कुमार) पर पूरी मूवी में अपनी एक्टिंग से भारी पड़े। जिसके बाद खलनायक को बॉलीवुड के इतिहास में अमर करने वाले गब्बर सिंह (अमज़द खान) के रोल को जनता ने खूब सराहा और उनके द्वारा बोले हुए सभी डायलॉग्स ने लोगो के दिलों में एक अलग छाप छोड़ी। आज बात करते है बॉलीवुड में खलनायक को अपनी अदाकारी से सबको मनमोहित करने वाले कुछ यादगार किरदार।

मुग़ल ए आज़म
जब भी मुग़ल ए आज़म की बात होगी तब सबसे पहले अकबर (पृथ्वीराज कपूर) का नाम सबकी ज़ुबान पर आता है। उनकी दमदार एक्टिंग और धांसू डायलाग डिलीवरी ने पिक्चर के ख़लनायक को नायक से ऊपर पहुँचा दिया। पूरी पिक्चर में मेगास्टार दिलीप कुमार उनके सामने बौने साबित हुये।

शोले
टॉप 10 इंडियन मूवीज में से एक मूवी शोले जिसमे जय वीरू की दोस्ती और ठाकुर की सधी हुयी परफॉरमेंस को भी मूवी के खलनायक गब्बर सिंह (अमज़द खान) ने मीलो पीछे छोड़ दिया। “कितने आदमी थे” , “होली कब है ?” और “ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर” 20वी सदी के सबसे बेहतरीन डायलॉग्स में से एक है।

शान
कुलभूषण खरबंदा के शाकाल वाले लुक का भूत लोगों पर कुछ इस कदर छाया था की 80 के दशक से लेकर आज तक अगर कोई भी अपने बाल मुंडवा लेता है तो लोग उसको शाकाल के नाम से बुलाते है।

मिस्टर इंडिया
“मोगैम्बो खुश हुआ” जब भी ये डायलाग कोई बोलेगा तो लोगों की ज़ुबान पर सिर्फ अमरीश पुरी का नाम ही आयेगा। उनकी करियर की सबसे बेहतरीन मूवीज में एक मिस्टर इंडिया भी है, जिसमे खलनायक ने नायक को चारों खाने चित कर दिया था।

खलनायक
सुभाष घई की अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म्स में से एक खलनायक मूवी जिसके खलनायक बल्लू (संजय दत्त) जिनके आगे जैकी और माधुरी दीक्षित जैसे दिग्गज कलाकार भी फीके पड़ गये।

डर
किंग ऑफ़ रोमांस (शाहरुख़ खान) ने जब खलनायक की भूमिका अदा की तो उनके रोल को लोगो ने खूब सराहा। पूरी पिक्चर में सिर्फ राहुल मेहरा ही छाये रहे और मूवी ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

ओमकारा
जब आप बल में सक्षम ना हो तो आपकी बुद्धि ही आपके शत्रु को पराजित करने में सहायता करती है। ऐसा ही कुछ ओमकारा के खलनायक लंगड़ा त्यागी ने अपनी भूमिका से साबित किया और उनके डूबते करियर को एक नयी शुरुआत मिली।

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर 
कैसे परिवार को बॉटकर आप एकछत्र राज कर सकते है ये रामाधीर सिंह (तिंग्मांशु धुलिया) ने मूवी में दिखाया और कैसे भाई को भाई के खिलाफ प्रयोग करते है। जिससे वे मूवी का मुख्य का आकर्षण का केंद्र साबित हुये। 

सेक्रेड गेम्स
“भगवान् को मानते हो”, “कभी कभी लगता है अपुन ही भगवान् है” ये डायलॉग लोगो के दिमाग पर आज कल कुछ इस तरह हावी है कि हर कोई अहम् ब्रह्मास्मि बोलता नज़र आ रहा है। गणेश गायतोंडे (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) ने एक बार फिर अपनी एक्टिंग से लोगो का ध्यान खींचने में कामयाब रहे।

सेक्रेड गेम्स 2
गुरुजी जिनसे लोग आशीर्वाद और सही दिशा की उम्मीद करते है क्या होता है जब मार्गदर्शक ही आपको सही दिशा दिखाने की जगह राह से भटकाने का काम करने लगे। ऐसा ही कुछ गुरूजी (पंकज त्रिपाठी) ने सेक्रेड गेम्स वेब सीरीज़ में किया और अपनी एक्टिंग से रोल के साथ पूरा न्याय किया।

Previous ArticleNext Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *