लाइफ का सबसे बड़ा सवाल आगे क्या करना है मेरे लाल 927

गुमराही का दौर आज कल कुछ इस कदर है छाया
करके देखा सबकुछ पर कुछ भी समझ ना आया।

लाइफ का सबसे बड़ा सवाल आखिर करना क्या है ? इस सवाल की खोज में कितने विद्वान् कितने ज्ञाता कितने ही युवा सिर्फ भटकते नज़र आते है। जो करना चाहते है वो कर नहीं पाते, जो कर रहे है वो समझ नहीं आ रहा है और जब समझ आया तो पता चला बहुत देर हो चुकी है। लक्ष्य का निर्धारण करना आज के ज़माने में उतना ही ज़रूरी हो गया है जितना जीने के लिए खाना।

किसी ज़माने में फैज़ फज़ल साब ने कहा था कि
वो लोग बड़े खुशकिस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे
हम जीते जी मसरूफ रहे
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आखिर में तंग आकर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया

जिसका सीधा सीधा असर आज के युवाओं पर दिखाई देता है। लाइफ को इतना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड बना देते है की कुछ भी करने से पहले सोचते ही नहीं की लाइफ किधर जाएगी खिले फूलों की तरह मुस्कुराएगी या पतझड़ के मौसम की तरह बिखर जाएगी। अपने टारगेट को जितना जल्दी आप समझ लेते है कि क्या करना है उतना ही ज्यादा अच्छा रहता है आपके लिए। बहुत बार ऐसी स्थिति आती है जब आप अपने भविष्य को लेकर चिंतित होते है कि क्या करना है। अब ऐसी स्थिति में रंगीला का गाना याद आना जरूरी है क्या करे क्या ना करे ये कैसी मुश्किल हाय, कोई तो बतादे इसका हल तो मेरे भाई।

लाइफ में गोल सेट करना आना चाहिए, कि आपको कब क्या करना है कैसे करना है। अपने जीवन का मार्गदर्शन जितनी जल्दी आप को समझ में आ जायेगा उतनी ही जल्दी आप सफलता को प्राप्त कर लेंगे। शुरू से ही आपको अपनी रूचि के हिसाब से तय कर लेना चाहिए, जिससे आगे चलकर कठिन परिस्थितियों में आपको कोई भी लक्ष्य से भटका ना सके। हमेशा अभ्यास करते रहिये। कभी भी अपने उद्देश्य से भटके मत। हर बार अपना बेस्ट देने की कोशिश करें। अपनी स्किल्स को बढ़ाते रहिये। सकारात्मक रहे, कभी भी फॅसे तो देखे दूसरे लोग कैसे कर रहे है और परिस्थितियाँ कितनी भी विषम हो कभी भी हार ना माने।

गर दिशा तुम्हारी ठीक है
और निशाना भी सटीक है
फिर रफ़्तार चाहे कोई हो
मंज़िल तुम्हारी नज़दीक है।

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